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मौत के खौफ में …….बाहुबलियो की जान…

JANMAT VICHAR

जनमत विचार (जनमत) :- माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या की घटना ने प्रदेश  की जेलों में बंद बाहुबलियों की नींद उड़ा दी है प्रदेश के बाहुबलियों के लिए जेल अभी तक सुरक्षित पनाहगाह थी लेकिन जेल के अन्दर मुन्ना बजरंगी की हत्या ने जेल में बंद बाहुबलियों को सकते में ला दिया अभी तक प्रदेश के माफिया जेलों से ही अपराध का साम्राज्य चलते रहें है जेल उनके लिए सबसे सुरक्षित ठीकाना होता था . जेल में ही बैठकर बड़े बड़े अपराधो को पटकथा लिखी जाती थी. जिसको उनके गुर्गे अंजाम देते है. बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की घटना के बाद से प्रदेश में विभिन्न जेलों में बंद बाहुबली मुखतार अंसारी, ब्रिजेश सिंह, बबलू श्रीवास्तव, अतीक अहमद जैसे लोगो की नींदे उड़ चुकी है और इन लोगो के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह जेल अब मौत का मैदान नज़र आने लगी है. हालाँकि मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद हाईप्रोफाइल अपराधियों की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. मुन्ना बजरंगी विधायक मुख़्तार अंसारी का करीबी बताया जाता है.

मुन्ना की हत्या एके बाद मुख़्तार अंसारी बाँदा जेल की अपनी बैरक से अभी तक बहार नहीं निकला है और न ही किसी से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की है . पहले जहाँ मुलाकातियो  का ताता लगा रहता था. वहीँ इनको जेल में बंद अपराधियों / बंदियों और मुलाकातियो में मौत की झलक दिखने लगी है. दूसरो की मौत की पटकथा लिखने वाले यह बाहुबली अपनी ज़िन्दगी को लेकर इतने सहमे नज़र आ रहें हैं की अपनि मौत का खौफ इनको सताने लगा है. जेल के अन्दर मात्र एक हत्या ने मौत के सौदागरों का दिन का चैन और रात की नींद हराम कर दी है. जहाँ अभी तक जेल के अन्दर अपनी ज़िन्दगी को लेकर बेफिक्र रहेने वाले बाहुबली अब हर आहट पर चौकन्ने नज़र आ रहें हैं. पल पल इनकी नज़र हर आने जाने वाले को दहसत भरी निगाह से देखने लगी हैं. शायद इनके मन में वो खौफ भर गया है जो कभी इनके शिकार की आँखों में नज़र आता था. और हो भी क्यों न जान ही तो जहाँ हैं कभी दूसरो को पल भर में मौत के घाट  उतार देते थे पर जब अपनी जान पर आयी तो दिल की धधकन ठहरने लगी और सांसो की रफ़्तार बदलने लगी.

जेल के अन्दर मुन्ना बजरंगी की हत्या कई सवाल खड़े करती है हो सकता है  की यह हत्या अपराध की दुनिया में होने वाले वर्चस्व की जंग के होने वाले नए गंगवार का आगाज़ हो लेकिन इस हत्या से एक बात तो साफ़ हो जाती है की जब सिस्टम में खराबी हो तो कारागारो की चारदीवारियो के अन्दर भी किसी की हत्या को अंजाम दिया जा सकता है. मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह पिछले कई दिनों से शासन प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियो से गुहार लगा चुकी थी उनके पति की हत्या हो सकती है. इसके बावजूद पुलिस प्रसाशन इसे लेकर मौन बना रहा. पुलिस की यह चुप्पी क्या किसी षड़यंत्र की तरफ इशारा करती है यह सवाल उठाना भी लाज़मी है क्योंकि जब सुरक्षित माने जाने वाली जेल के अन्दर हत्या हो जाती है तो प्रदेश की सरकार और जेल प्रशासन पर सवाल उठने लाज़मी हैं. भले ही इस हत्या के बाद सूबे के मुखिया योगी अदित्यानाथ ने जांच के आदेश दियें हैं और जेल की सुरक्षा के लिए एक कमिटी का भी गठन किया गया है. लेकिन इस हत्या ने  मुख्यमंत्री कर्यलाय को भी सवालो के घेरे में ला दिया है. क्योंकि  जेल मंत्रालय का जिम्मा भी खुद मुख्यमंत्री के पास ही है.

अंकुश पाल / अमिताभ चौबे 

 

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