भारत के ‘जेम्स बॉन्ड’ का आज है जन्मदिन

व्यक्त्ति-विशेष

व्यक्त्ति-विशेष(जनमत):- हमारे देश में ऐसे कई जाबांज हुएं हैं जो पर्दे के पीछे रहतें हुए भारत  माता की सुरक्षा के लिए हर पल तैयार रहेंते हैं भले ही देश के लिए इनका नाम  अनजान हों लेकिन देश की सुरक्षा का जिम्मा इन्ही के कंधो पर बना रहता है| जहाँ देश की सुरक्षा केवल बॉर्डर पर सैनिकों को तैनात करने से नहीं होती, बल्कि कुछ ऐसे समर्पित देशभक्तों की जरूरत होती है, जो देश के लिए गुमनामी  जिंदगी बिताते हुए दुश्मन के बीच में रहकर सेना को जानकारियाँ उपलब्ध  कराये। जिससे  देश के दुश्मनों का जड़ से खात्मा किया जा सके। इन्हीं देशभक्तों में अजित डोभाल का बड़ा नाम है एनएसए अजीत डोभाल यूं ही भारत के जेम्स बॉन्ड नहीं कहलाते हैं। उनकी  बहादुरी के आगे दुश्मन भी थर-थर कांपते हैं।

यही कारण है कि उन्हें दोबारा देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। इतना ही नहीं उन्हें  मोदी कैबिनेट में भी शामिल किया गया। आज उनका जन्मदिन है। अजीत डोभाल अकेले ऐसे अधिकारियों में से हैं, जिनकी अपनी ऑफिस बिल्डिंग है।  वे भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। अजीत डोभाल को सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से  भी सम्मानित किया जा चुका है। अजीत न सिर्फ एक बेहतरीन खुफिया जासूस हैं।  बल्कि एक बढ़िया रणनीतिकार भी हैं। वही उन्होंने अपनी जिंदगी के 40 वर्ष देश की सुरक्षा के लिए गुमनामी में बिताए और कई बार आतंकी अटैक से अपने देश को बचाए, पाकिस्तान  के कब्जे वाले कश्मीर में सफल सर्जिकल स्ट्राइक कर  दुश्मन देश की रातों की नींद और दिन की चैन उड़ा चुके है।

वे पाकिस्तान में सात सालों तक खुफिया जासूस की भूमिका में रह चुके हैं। पाकिस्तान में अंडर कवर एजेंट की भूमिका के बाद वे इस्लामाबाद में स्थित  इंडियन हाई कमिशन के लिए काम किया। कांधार में आईसी-814 के अपहरण प्रकरण में अपहृत लोगों को सुरक्षित वापस लाने में अजीत की अहम भूमिका रही थी। दुश्मन देश उनके तेज तर्रार काम करने के तरीके को अच्छी तरह से जानता है, इसलिए केवल अजित डोभाल के नाम से ही दुश्मन दल में खलबली मच जाती है। अजित डोभाल का जन्म उत्तराखंड के पौरी गढ़वाल के गढ़वाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक इंडियन आर्मी मेन थे, इसलिए उनकी शुरुआती शिक्षण अजमेर मिलिटरी स्कूल में हुई। 1967 में उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पहली पोजीशन के साथ मास्टर की  डिग्री प्राप्त की।

इसके बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए, जिस उन्होंने 1968 में केरल केडर से कम्पीट किया और पुलिस अफसर बन गए। इसके चार साल बाद वे 1972 में इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए। यहीं से उनके जीवन का नया रूप जो एक जासूस के रूप में प्रारंभ हुआ। जो  मैडल किसी  भी आईपीएस  अफसर को  17  वर्ष  बाद  दिया  जाता  है  वो  मैडल  आपने  सेवा  के  सिर्फ 6  वर्षों में  ही  पा  लिया  था। वही वो 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के चीफ के पद से रिटायर हुए हैं। भारतीय सेना द्वारा म्यनमार में सीमापार सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए डाभोल ने भारत के शत्रुओं को सीधा और साफ संदेश दे दिया है कि अब भारत आक्रामक-रक्षात्मक रवैया अख्तियार कर चुका है।

पीओके में अंजाम दिए गए सर्जिकल के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बड़ा हाथ था। ऑपरेशन की निगरानी दिवंगत  पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और डीजीएमओ ले.जन. रनबीर सिंह ने ही की थी। अजीत डोभाल के मार्गदर्शन में म्यामार में भी भारतीय सेना ने घुसकर उग्रवादियों को मौत की नींद सुला दिया था।

हमारे जनमत न्यूज़ परिवार की  ओर से तहेदिल से  अजित डोभाल को  जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं…..!

Posted By:- Amitabh Chaubey