धरती के भगवन ने नवजात को दिया “जीवनदान”....

धरती के भगवन ने नवजात को दिया “जीवनदान”….

Exclusive News UP Special News

लखनऊ(जनमत): “जीवन” शब्द के अन्तर्गत सारी सृष्टिसमाई है| जीवन की सार्थकता ही अनमोल है  जीव को नया जीवन प्रदान करना भले ही इंसान के हाथ में नहीं है लेकिन इसे संरक्षण प्रदान करना व इसे सहेजना मनुष्य के हाथ में जरुर है|  इसी कड़ी में धरती के भगवन कहे जाने बाले डाक्टरों ने तकनिकी का प्रोयोग करके नवजात को नया जीवन प्रदानं किया है| कही ना कही डाक्टरों ने ठहरती सासों को सहेजते हुए निरताता दी और नवजात को “जीवन” का अमूल्य उपहार दिया है| लखनऊ के सहारा हास्पिटल में जटिल बीमारी से  पीड़ित एक जच्चा-बच्चा(माँ और नवजात) को डाक्टरों ने बेहतर ईलाज किया| यह नवजात प्रीमिच्योर  हुआ था और साथ ही उसका कोई भी अंग ठीक से काम नहीं कर रहा था। समय से पहले जन्म लेने वालों बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना रहती है| ढाई माह तक चले इलाज के  बाद डाक्टरों ने उसे एक नया जीवन दिया।  शिशु  पृथ्वी पर किसी भी मानव की सबसे पहली अवस्था है। जन्म से 1 मास तक की आयु का शिशु  नवजात   कहलाता है जबकि 1 माह से तीन वर्ष तक के बच्चे को सिर्फ शिशु कहते हैं। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद  जिले की रहने वाली 34 वर्षीय महिला को गर्भावस्था के दौरान कई बहुत सारी बड़ी समस्याएं हो गयीं। वही स्थानीय डाक्टरों ने उसे किसी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इलाज कराने की  राय दी।

तो परिजनों ने महिला को लखनऊ के सहारा हास्पिटल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डा. अंजलि सोमानी से राय लिया। जब डाक्टरों ने अपनी जांच सुरु की तो पता चला कि यूरीन में इंफेक्शन सहित कई समस्याएं थीं, इससे केस पेचीदा हो गया। गर्भवती को इमरजेंसी में एडमिट करके सिजेरियन डिलीवरी करायी गयी। नवजात  प्रीमिच्योर था और उसका वजन तक़रीबन 750 ग्राम था 26 हफ़्ता के जन्मे इस शिशु की  स्थिति बहुँत ही नाजुक बनी हुई थी फिर भी डॉक्टर्स ने हार नहीं मानी और ईलाज सुरु कर दिया। हास्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. एम यू हसन ने नवजात  को एनआईसीयू में भर्ती कर दिया। वही बच्चे के शरीर का कोई भी हिसा ठीक तरह से  काम नहीं कर रहा था और नवजात का फेफड़े भी अभी ठीक से विकसित नहीं हो पाया था। ऐसे में नवजात  को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। वही डॉक्टर्स ने नवजात को तक़रीबन 1 माह तक नसों के द्वारा  खाना यानी तरल पदार्थ खिलाया। नवजात के इलाज के दौरान उसे कई  गंभीर जटिल समस्याएं जैसे  की ब्लड इन्फेक्शन ,ब्रेन हैमरेज, अस्थमा आदि से गुजरना पड़ा जिसे  डाक्टर हसन ने बेहद कुशलतापूर्वक अपने अनुभव से नवजात को सफल इलाज़ किया समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे यानी प्रीमैच्योर बच्चे को दमा का खतरा अधिक होता है। करीब ढाई माह तक चले नवजात के इलाज के बाद उसके शरीर के सभी अंग पूरी तरह से ठीक हो गये हो गए  सहारा हास्पिटल की बेहतर सेवाओं का नतीजा है कि उक्त नवजात को सफल उपचार मिला और उसको एक नया नवजीवन मिला|

अमिताभ चौबे

chaubeyamitanh0@gmail.com