International Women’s Day special : इन महिलाओं ने लिखी “हौसले” की इबारत…

Exclusive News JANMAT VICHAR

जनमत विचार (जनमत) :- अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश और दुनिया में नारी शक्ति को सलाम किया जाता है। दुनिया के हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए उनकी हर क्षेत्र में स्थापित  उपलब्धियों को याद किया जाता है| आज महिलाएं घर-परिवार और बाहर की सभी जिम्मेदारी को पूर्णता से निभा रही हैं।  वही कुछ महिलाएं तो ऐसी हैं जिन्होंने अपने करियर के रूप में ऐसे काम को चुना  जो महिलाओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। जबकी वहां भी महिलाओं का  परचम लहराया और उन्होंने कामयाबी के झंडे गाड़े। आज चाहे भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हो या  फिर पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल हो यार फिर बॉक्सर मैरी कॉम हो इन महिलाओं के जीवन से  हमें कुछ न कुछ जरूर सिख सकते है। अगर एक आदमी को शिक्षित किया जाता हैं तब एक आदमी ही शिक्षित होता हैं लेकिन जब एक औरत को शिक्षित किया जाता हैं तब एक पीढ़ी शिक्षित होती हैं औरत ही समाज की वास्तविक शिल्पकार हैं नारि प्रेम करने के लिए हैं समझने की वस्तु नहीं|

जीवन का यही अनमोल सारनारी नहीं थी कभी बेचारी”|
क्योंकि नारी में निहित है इस सृष्टि की शक्ति सारी।
मां के साथ ममता मिलती, बहन से मिलता हमेशा दुलार
नारी शक्ति को पूजनीय समझो, ये लगाती जीवन नैया पार

                                                                                    दीपक संधू

दीपक संधू का जन्म 19 दिसम्बर 1948 को हुआ था|  दीपक संधू भारत की पहली महिला मुख्य सूचना आयुक्त रह चुकी हैं। 1971 बैच की भारतीय सूचना सेवा की पूर्व अधिकारी संधू कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं और साथ ही साथ  पीआईबी(PBI) की प्रधान महानिदेशक, मीडिया एवं संचार,डीडी न्यूज की  महानिदेशक और 2009 में सूचना आयुक्त रह चुकी है और साथ ही साथ ऑल इंडिया रेडियो(AIR) न्यूज की महानिदेशक रह चुकी हैं। वे कान, बर्लिन, वेनिस और टोक्यो में  हुए अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों, रूस के ग्लेनक्षीक और साइप्रस में आतंकवाद एवं इलेक्ट्रानिक मास मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अलावा अटलांटा, अमेरिका एवं बीजिंग में समाचार प्रमुखों के सम्मेलन में देश का  प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

                                                                                   वी एस रमा देवी

भारत की पहली और एकमात्र महिला मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस रमादेवी को भारत की प्रथम महिला चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने का गौरव प्राप्त है। वो कर्नाटक की राज्यपाल भी रह चुकी है| उनका जन्म 15 मार्च 1934 को हुआ था. उनके परिवार में 1 बेटा जिस का नाम वीएस राकेश है और 2 बेटियां वीए रेखा एवं वीए राधिका चौधरी हैं| 79 साल में 17 अप्रैल 2013 को बेंगलूरू में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था|

जब एक आदमी औरत से प्यार करता हैं उसे अपनी जिंदगी का एक हिस्सा देता हैं लेकिन एक औरत जब प्यार करती हैं तब अपना सब कुछ दे देती हैं किसी भी सभ्यता का आंकलन औरतो के व्यवहार से किया जा सकता हैं आदमी अपनी नियति को सम्भाल नहीं सकते हैं उनके लिए यह कार्य उनके जीवन से जुड़ी औरत करती हैं किसी भी समाज की उन्नति उस समाज की औरतों की उन्नति से मापी जा सकती हैं कोई भी राष्ट्र उन्नति के शिखर पर नहीं पहुँच सकता जब तक कि उस राष्ट्र में महिलाओं को समान अधिकार ना प्राप्त हो महिलायें कमाल होती हैं वह अपने चेहरे पर मुस्कान का मुखोटा पहने यह दिखाती हैं कि सब कुछ ठीक हैं पर वास्तविक्ता में उसके कन्धो पर दुनियाँ का बोझ हैं और उसका जीवन उसकी उँगलियों से पटाखों की तरह फिसल रहा हैं|

                                                                                    मीरा कुमार

मीरा कुमार 3 जून वर्ष 2009 में लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष स्पीकर निर्विरोध चुनी गईं थीं। मीरा कुमार का जन्म 31 मार्च 1945 को सासाराम बिहार में एक दलित परिवार में हुआ था और वे पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं। बिजनौर से चुनाव लड़ते हुए साल 1985 में वो पहली बार सांसद  बनी थी।

                                                                                    प्रतिभा पाटिल

प्रतिभा पाटिल को आजादी के 60 वर्ष बाद भारत की पहली राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इनका जन्म 19 दिसम्बर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले के नंदगांव में हुआ था। इन का पूरा नाम प्रतिभा देवी सिंह पाटिल हैं। वर्ष 1962 में प्रतिभा पाटिल ने पहली बार कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की और राजनीति में प्रवेश किया। आप को बता दे की प्रतिभा पाटिल महज 27 वर्ष की उम्र में ही मुंबई की जलगांव विधानसभा से विधायक चुनी गईं। प्रतिभा पाटिल ने वकालत में  भी खूब नाम कमाया। इस दौरान वो समाजसेवा और जनकल्याणकारी कार्यो से भी जुडी रही। 7 जुलाई 1965 में उन्होंने डॉ. देवीसिंह रणसिंह शेखावत से शादी कर ली। अपने 28 वर्ष के राजनितिक करियर में वो बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही। साथ ही साथ भारत के विकास में उनका बहुत योगदान रहा हैं उन्होंने महिला विकास, और बाल विकास के लिए कई कदम उठाए।

भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे ‘भोग की वस्तु‘ समझकर आदमी ‘अपने तरीके‘ से ‘इस्तेमाल‘ कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है।

                                                                        मैरीकॉम

भारत की 1 महिला खिलाड़ी जिन्होंने अपनी महान उपलब्धियों से देश का नाम रौशन किया  जिन का नाम है  मेरी कोम, जो 1 इकलोती भारतीय महिला बॉक्सर है| मेरी ने 2012 में हुए ओलंपिक में क्वालीफाई किया था, और ब्रोंज मैडल हासिल किया था| इसके अलावा वे 5 बार वर्ल्ड बॉक्सर चैम्पियनशीप जीत चुकी है| मेरी ने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुवात 18 साल की उम्र में ही कर दी थी| मेरी कोम समस्त भारत के लिए प्रेरणा स्त्रोत है|

                                                                                   इंदिरा गांधी

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी| वो 3 बार भारत की प्रधानमंत्री रही है| इन को लोग आयरन लेडी के नाम से भी जानते है| इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को आर्थिक एवं बैद्धिक रूप से समृद्ध परिवार में इलाहाबाद के आनंद भवन में हुआ था। उनके पिता पं. जवाहर लाल नेहरू तथा माता का नाम श्रीमती कमला नेहरू तथा दादा का नाम पं. मोती लाल नेहरू था। ये एक बहुत बड़े राजनैतिक परिवार से थी| इन का पूरा नाम ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी’ था| प्रधानमंत्री आवास में 31 अक्टूबर 1984 को उनके ही 2 सिख अंगररक्षकों ने उनकी हत्या कर दी थी।

नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है। उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है। औरत कभी खिलौना नहीं होती वो तो परमात्मा के बाद वो व्यक्ति है जो मौत की गोदमें जाकर जिन्दगी को जन्म देती हैं”||

तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है लेकिन 
तू इस आंचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था”||

इसी के साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर वह अपने अकाउंट्स को उन महिलाओं को देंगे जिनके कार्य और जिंदगी ने हमें प्रेरित किया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने ट्विटर के जरिए दी।

जीवन का यही अनमोल सार- नारी नहीं थी कभी बेचारी”| क्योंकि नारी में निहित है इस सृष्टि की शक्ति सारी।मां के साथ ममता मिलती, बहन से मिलता हमेशा दुलार
नारी शक्ति को पूजनीय समझो, ये लगाती जीवन नैया पार

मुस्कुराकर, दर्द भूलकर
रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी
हर पग को रोशन करने वाली
वो शक्ति है एक नारी” ||

Posted By:- Amitabh Chaubey