निराधार तथ्यों और बेबुनियादी आरोपों को “कॉलेज प्रबंधन” ने किया “खारिज”…

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लखनऊ (जनमत):- यूपी की राजधानी लखनऊ के राजा बाजार सुभाष मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण भगवती विद्या मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज  इन दिनों  कोरोना के साथ ही  निराधार और झूठे आरोपों का भी सामना  कर रहा है…. दरअसल  शिक्षक नेता डॉ आर० पी० मिश्रा द्वारा दिनांक २० अक्टूबर २०२० को क्वीन्स गर्ल्स इंटर  कॉलेज लखनऊ  द्वारा बेहद गंभीर , निराधार और अपमानजनक आरोप विद्यालय पर लगायें गएँ और इसी के साथ ही इनका प्रकाशन जिले के कई समाचार पत्रों में भी किया गया, वहीँ इसपर लक्ष्मी नारायण भगवती विद्या मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधन ने    प्रेस वार्ता कर   स्थिति को स्पष्ट करते हुए लगायें गएँ सभी आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा और सभी आरोपों को साजिशन मनघडंत एवं बेबुनियाद बताया है.

साथ ही बड़े और गंभीर सवाल भी उठायें गएँ और बिना दुसरे पक्ष को जाने एकतरफा प्रकाशित की गयी ख़बरों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गयी, चूकी यह खबरे बिना वास्तविक स्थिति जाने एकतरफा प्रकाशित की गयी और गंभीर आरोपों से एक बेदाग़ संतान को दागदार करने का असफल प्रयास भी किया गया. इस दौरान प्रेसवार्ता का आयोजन कर लक्ष्मी नारायण भगवती विद्या मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधन ने झूठे और निराधार आरोपों पर अपना पक्ष रखा और शिक्षा विभाग सहित अन्य सभी लोगो को वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए “झूठे” और मनघडंत  बेबुनियाद तथ्यों के विपरीत इस साजिश से पर्दा उठाने का भी प्रयास किया गया.दरअसल लक्ष्मी नारायण भगवती विद्या मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज को लेकर छपी ख़बरों जो की “भ्रामक” और निराधार और झूठी हैं में विद्यालय की पूर्व शिक्षिका श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव का दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज लखनऊ में प्रधानाचार्य के पद पर चयन हो जाने के फलस्वरूप उनको कार्यमुक्त किये जाने के लिए दो लाख रुपये की घूस मांगी गयी और नहीं दिए जाने पर कार्यमुक्ति आदेश नहीं दिया गया, जबकि ये आरोप साफ़ तौर पर झूठे हैं क्योंकि श्रीमती दिव्या को विद्यालय प्रबंधन ने दिनांक 05-10-2019 को ही कार्यमुक्ति आदेश निर्गत कर दिया गया था जिसे उन्होंने विद्यालय में उपस्थित होकर प्राप्त भी कर लिया.

इसी के साथ ही श्रीमती दिव्या ने चयन समबन्धित पत्र दिनांक २२-०८-२०१९ प्राप्त होने पर दिनांक ०१ अक्टूबर २०१९ से कार्यमुक्त किये जाने समबन्धि पत्र लिखित रूप से हमारे विद्यालय में दिया था और मौखिक अनुरोध भी किया, जबकि सच्चाई यह है की दिनांक ३०-०९-२०१९ में हस्ताक्षरित श्रीमती दिव्या द्वारा लिखा हुआ एक पत्र दिनांक ०१-१०-२०१९ को मिला था जिसमे दिनांक ०१-१०-२०१९ से एक वर्ष का अवैतनिक अवकाश और कार्यमुक्ति किये जाने का अनुरोध भी किया गया था. जिसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने अपनी त्वरित कार्य शैली के तहत नियमित प्रक्रिया के मुताबिक ०४ ओक्टूबर २०१९ को विद्यालय के प्रबंध कमिटी की औपचारिक आवश्यक बैठक कर दिनांक ०५-१०-२०१९ को श्रीमती दिव्या को कार्यमुक्ति आदेश निर्गत करते हुए उन्हें उपलब्ध भी करा दिया गया. गौरतलब है की इस दौरान श्रीमती दिव्या द्वारा कभी भी अपने कार्यभार ग्रहण कर लिए जाने सम्बन्धी कोई भी सूचना विद्यालय को उपलब्ध ही नहीं कराई गयी, जिसके कारण विद्यालय प्रबंधन ने प्रक्रिया अपनातें हुए कार्यवाही की थी.

कार्यमुक्ति के सात दिन बाद श्रीमती दिव्या द्वारा दिनांक १२-१०-२०१२ को एक पत्र कार्यालय में प्राप्त कराया गया जिसमे ०१- १० -२०१९ को दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज में  प्रधानाचार्य  के पद पर कार्यभार ग्रहण करने की सूचना देते हुए उसी तिथि से कार्यमुक्ति आदेश दिए जाने की मांग की गयी थी, जो नियम विरुद्ध होने के कारण विद्यालय प्रबंधन द्वारा अस्वीकार कर दिया गया.  वहीँ एक आरोप यह भी लगाया गया कि जिला विद्यालय निरीक्षक (द्वितीय) लखनऊ द्वरा दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज में प्रधान्चार्य के पद पर दिनांक ०१-१०-२०१९ से ही श्रीमती दिव्या का हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिय गया  था फिर भी प्रबंधन द्वारा कार्यमुक्त आदेश उक्त तिथि से नहीं दिया गया, जबकि सच्चाई तो यह है की कार्यमुक्ति आदेश के बिना जिला विद्यालय निरीक्षक (द्वितीय) द्वारा उनका हस्तक्षर प्रमाणित नहीं किया जाना चाहिए था, ऐसा क्यों किया गया यह समझ से परे हैं या यह कहे कि नए और पुराने विद्यालय प्रबंधन की तरह शिक्षा विभाग को भी अँधेरे में रखा गया.

एक अन्य आरोप है कि  १६ सितम्बर २०२० को संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक लखनऊ द्वरा मौखिक रूप से कहे जाने पर भी हमारे विद्यालय प्रबंधन द्वरा कार्यमुक्ति आदेश नहीं दिया गया. इस मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक महोदय द्वारा १६ सितम्बर २०२० को बुलाये गए बैठक में बतौर प्रबंधक मुझसे मौखिक ही कहा गया की पांच दिनों (दिनांक ०१-१०-२०१३ से दिनांक ०५-१०-२०१९) की उपार्जित अवकाश का प्राथर्ना पत्र लेकर आप चाहें तो मामले को इनके हित में निस्तारित कर सकतें हैं लेकिन इनका वेतन नए विद्यालय से ही दिया जाएगा. आरोप है की वेतन एक साल से रोका गया, ये बताना भी ज़रूरी है की किसी शिक्षक/ प्रधानाचार्य का वेतन निर्गत/स्वीकृत करने का अधिकार  जिला विद्यालय निरीक्षक के पास होता है, न की विद्यालय प्रबंधन के पास… विदित हो कि आरोप लगाने की भूमिका में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार की योजना मिशन शक्ति अभियान का आधार लिए गया है…

जबकि यहाँ ये बताना आवश्यक है कि एक नारी की खुद की गलतियों की वजह से पिछले तीन महीनो से हमारे विद्यालय की सभी शिक्षिका और कर्मचारियों को इस करोंना संकट की घडी में बिना वेतन  के कितनी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है, ये शायद ही को कोई समझ सकता है और महसूस कर सकता है, इसलिए ये ज़रूरी है कि किसी भी खबर के प्रकाशन और बिना दुसरे पक्ष के स्थिति साफ़ किये हुए यदि कोई गंभीर आरोप किसी खबर के माध्यम से आम लोगो तक पहुचाया जाता है तो इसके लिए नैतिक जिम्मेदारी पत्रकार जगत से जुड़े लोगो की भी बराबर होने चाहिए क्योंकि एकतरफ़ा किसी भी खबर का प्रकाशन और परिचालन एक व्यक्ति विशेष के लिए ही नहीं वरन एक संस्थान के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है, और निराधार तथ्यों और बेबुनियादी आरोपों की वास्तविकता परखें और असलियत जाने बिना किसी संस्थान को कटघरे में खड़ा करना कहाँ तक “ठीक” है, यह भी एक बड़ा सवाल है…..

 

Posted By:- Ankush Pal,

Correspondent,Janmat News.